बालासाहब ठाकरे इन दिनों सठिया से गए लगते है। वो आज तक महारास्ट्र से बाहर नहीं गए और बाते बड़ी बड़ी करते हैं दरअसल वो राज ठाकरे के हाथों अपनी राजनितिक जमीं खिसकते देख रहे हैं तब जो मुट्ठी भर कट्टरवादी लोग उनके पास बचे है unse अपनी saath के dasak की राजनीती phir से चमकाने की koshis कर रहे है।
Sunday, 7 February 2010
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